हमारे बारे में

महात्मा गांधी ने ग्राम स्वराज में गांव के कुटीर, लघु और कृषि उद्योग को शिक्षा के साथ जोड़ने पर जोर दिया था। उन्होंने स्थानीय संगठनों को योग्य एवं कुशल बनाने और पारम्परिक संसाधनों के अधिकाधिक विवेकपूर्ण उपयोग की भी बात कही थी। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु मध्यप्रदेश शासन ने मई १९९० में ग्रामोद्योग विभाग की स्थापना की है। तब से विभाग निरंतर ग्रामोद्योगों के सुदृढ़ीकरण की दिशा में

अग्रसर है। कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग का नेतृत्व कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री द्वारा किया जाता है। प्रशासनिक स्तर पर अपर मुख्य सचिव, दो उप सचिव, एक अवर सचिव और दो अनुभाग अधिकारी की सेवाएं कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग को उपलब्ध हैं।

विभागाध्यक्ष

  • आयुक्त हाथकरघा एवं हस्तशिल्प, मध्यप्रदेश, भोपाल
  • आयुक्त, रेशम संचालनालय, मध्यप्रदेश, भोपाल

विकास कार्यो की समुचित व्यवस्था के लिये विभाग के अंतर्गत तीन सार्वजनिक उपक्रम और दो राज्य स्तरीय सहकारी संघ कार्यरत हैं।

सार्वजनिक उपक्रम

  • मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड, भोपाल
  • संत रविदास मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम, भोपाल
  • मध्यप्रदेश माटी कला बोर्ड, भोपाल

राज्य स्तरीय सहकारी संघ

  • मध्यप्रदेश राज्य हाथकरघा बुनकर सहकारी संघ मर्यादित जबलपुर (परिसमापन अन्तर्गत)
  • मध्यप्रदेश स्टेट सेरीकल्चर डेव्हलपमेंट एण्ड टे्रडिंग को-आपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड, भोपाल।