हाथकरघा एवं हस्तशिल्प संचालनालय

मध्यप्रदेश शासन

महेश्वर

महेश्वरी साड़ी एवं ड्रेस मटेरियल का संक्षिप्त विवरण

देवी श्री अहिल्याबाई होल्कर द्वारा सन् 1767 ई. में महेश्वरी (प्राचीन महिष्मति) को होल्कर राज्य की राजधानी बनाया गया तब उन्होने मंदिरों तथा घाटों में निर्माण एवं शिक्षा प्रसार के साथ-साथ उद्योग धंधो को भी बढावा दिया । इसी तारतम्य में हैदराबाद, माण्डव,गुजरात आदि अन्य क्षेत्रों से हाथकरघा के कुशल करीगरों को यहॉं लाकर बसाया गया । देवी अहिल्याबाई होल्कर के पश्चात भी होल्कर शासकों द्वारा इस उद्योग को जीवित रखा गया । सन् 1921 में तत्कालीन शासक श्रीमंत तुकोजीराव होल्कर द्वारा महेश्वर में विविंग एण्ड डाईग डिमास्ट्रेशन फेक्ट्री की स्थापना की गई। इस फेक्ट्री का उद्देद्गय बुनकरों को तत्कालीन बुनाई से संबंधित तकनीकी ( Weaving Technology ) से अवगत कराना था।

1. महेश्वरी  साड़ी एवं वस्त्र के लिए ताने में 2/22 सिंगल रॉ सिल्क, 20/22 सिंगल डिगम सिल्क, 2/120 एस मर्सराइज्ड कॉटन, जरी इमिटेशन, कोसा आदि एवं बाने में 80 एस कॉटन, 20/22 डिगम सिल्क 02 प्लाय एवं 03 प्लाय जरी इमिटेशन आदि यार्न का उपयोग किया जाता है ।

महेश्वरी साड़ी में उपयोग होने वाला उक्त यार्न बहुत ही मुलायम होने के कारण यह साड़ी हल्की होती है तथा शरीर पर महसूस नहीं होती है । साथ ही दिखने में अति सुन्दर लगती है ।

2. महेश्वरी साड़ी में उपयोग होने वाले रंगों में शरीर को किसी प्रकार की हानि नहीं होती है न ही किसी प्रकार की एलर्जी होती है क्योंकि महेश्वरी साड़ी व वस्त्र निर्माण के धागे की रंगाई में उपयोंग होने वाले कलर हल्का व इंग्लिश कलर होते है जो ऑखों को देखने में अच्छे लगते है तथा ये कलर ऑखों को चुभते नहीं है । महेश्वरी साडियों में मौसम के हिसाब से भी कलर उपयोग किये जाते है । साथ ही देश के विभिन्न भागों के वातावरण के हिसाब से रंग उपयोग किये जाते है ।

3. महेश्वरी साड़ी व वस्त्रों की बार्डर एवं पल्ले में जो डिजाईन बनाई जाती है, वह डिजाईन सीमित एवं निर्धारित होकर यह डिजाईन महेद्गवर में देवी श्री अहिल्या बाई होल्कर द्वारा निर्मित कराये गये किले एवं मंन्दिरों पर उत्कीर्ण नक्काशी एवं डिजाईनों में से ही चयनित है, एवं इन्ही डिजाईनों के कारण महेद्गवरी साड़ी एवं वस्त्रों की पहचान निर्धारित है ।

4. महेश्वरी साड़ी में उपयोग होने वाले बार्डरों के कुछ प्रचलित नाम है जैसे :- बुगडी किनार, हंसा बार्डर, व्ही किनार, नर्मदा लहर, डब्ल्यू किनार, रूई फूल, चमेली फूल आदि है।

5. महेश्वरी वस्त्रों की अपनी अनूठी पहचान होने के कारण भारत सरकार द्वारा महेश्वर वस्त्रों को जी.आई.एक्ट में पंजीकृत किया गया हैं।

6. वर्तमान में महेश्वर में लगभग 2700 करघे स्थापित है। जिनके माध्यम से लगभग 8000 बुनकरो को रोजगार में संलग्न कराया गया है। अनुमानित वार्षिक उत्पादन लगभग 25.00 करोड़ रूपये का है।

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