हाथकरघा एवं हस्तशिल्प संचालनालय

मध्यप्रदेश शासन

चंदेरी

चन्देरी साड़ी एवं ड्रेस मटेरियल का संक्षिप्त विवरण

चन्देरी मालवा और बुंदेलखंड की सीमा पर बसा है। इस शहर का इतिहास 11 वी सदी से जुडा है, जब यह मध्यभारत का एक प्रमुख व्यापार केंद्र था, मालवा मेवाड़ गुजरात के प्रचीन बंदरगाह और डक्कन के क्षेत्र इससे जुड़े हुए थे। चन्देरी मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित एक ऐतिहासिक नगर है। बुन्देलों और मालवा के सुल्तानों की बनवाई कई इमारतें यहां देखी जा सकती है। इसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। चंदेरी बुन्देलखंडी शैली की साड़ियों के लिए काफी प्रसिद्ध है, पारपरिक हस्तनिर्मित साड़ियों का यह एक प्रसिद्ध केन्द्र है। लगभग 1305 ई. पूर्व में लखनोटी जो कि बगलादेश में स्थित है। से बुनकर बुनाई कार्य करने वाले कारीगर चन्देरी में विस्थापित होकर बसाये गये थें । चन्देरी में लगभग 60 प्रतिद्गात आबादी हाथकरघा बुनाई कार्य में संलग्न है।यॅहा की हाथ से बुनी हुई साड़िया त्रुटिहीन गुणवत्ता की होती है और जरी की बॉर्डर इसकी विशेषता है। चन्देरी में हाथकरघा वस्त्रों के तकनीकी उत्पादन में सहयोग हेतु म.प्र. शासन का हाथकरघा प्रशिक्षण केन्द्र सन 1910 से स्थापित है।

  • बनारसी एवं अन्य सिल्क साड़ियों के उत्पादन में डिजाइनों का निमार्ण में प्रमुख रूप से सिल्क यार्न का उपयोग होता है जबकि चन्देरी साड़ियों के डिजाईनों में सिल्क एवं कॉंटन यार्न दोनो से उत्पादित होते है।
  • चन्देरी साड़ियों की बुनाई में 13/65 एंव 18/20 डेनीयर सेमी डिगम यार्न का उपयोग होने से उनमें स्टिफनेस होने के कारण क्रीज इफेक्ट अच्छा आता है। चन्देरी साड़ियों की महीनता ढाका की मलमल के समान होती है।
  • चन्देरी साड़ियों में रंग सयोजन अत्यंन आकर्षक होने के साथ-साथ प्रायः सभी मौसम के अनुकूल होते है।
  • चन्देरी साडियों में जरी का उपयोग भी अत्यंत आकर्षक रूप से डिजाइनों में किया जाता है।
  • चन्देरी वस्त्रों की अपनी अनूठी पहचान होने के कारण भारत सरकार द्वारा चन्देरी वस्त्रों को जी.आई.एक्ट में पंजीकृत किया गया हैं
  • वर्तमान में चन्देरी में लगभग 4508 करघे स्थापित है। जिनके माध्यम से लगभग 15000 बुनकरो को रोजगार में संलग्न कराया गया है। अनुमानित वार्षिक उत्पादन लगभग 50.00 करोड़ रूपये का है।