हाथकरघा एवं हस्तशिल्प संचालनालय

मध्यप्रदेश शासन

वारासिवनी

क्लस्टर के साड़ी एवं ड्रेस मटेरियल का संक्षिप्त विवरण

वारासिवनी जिला बालाघाट पशिचमी मध्यप्रदेश में हाथकरघा बाहुल्य क्लस्टर है जंहा पर हाथकरघा उद्योग का इतिहास लगभग 150 वर्ष पुराना है। वारासिवनी के अन्तर्गत मेहंदीवाड़ा, हटटा आदि गांवों में हलवा, हलवी कोष्टी समाज के बुनकर प्रमुख रूप से बुनाई का कार्य करते थे। जिनके द्वारा पूर्व में महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ राज्यों के मांग के अनुसार सूती साड़ियों का उत्पादन बहुतायात में किया जाता था।

  1. जनता वस्त्र उत्पादन की योजना लागू होने के पश्चात अधिकांश बुनकर जनता वस्त्र के उत्पादन में संलग्न हो जाने से उनकी बुनाई कौशल का ह्रास हो गया था। किन्तु क्लस्टर आधारित विकास की अवधारणा को लागू करने के पश्चात बुनकरों द्वारा पुनःअपनी पूर्व प्रचलित परम्पराओं के अनुसार हाथकरघा वस्त्र बुनाई के कार्य में कुशलता प्राप्त कर ली गयी है। परिणाम स्वरूप बुनकरों द्वारा फाईन काउंट की चन्देरी एवं महेश्वरी पैटन आधारित साड़ियों का उत्पादन प्रारम्भ कर दिया है।
  2. बुनकरों द्वारा 2/80 एस मर्सराइज कॉटन एवं 80 एस रंगीन धागों का उपयोग कर आकषर्क रंग संयोजन से साड़ियों एवं ड्रेस मटेरियल वस्त्रों का उत्पादन किया जा रहा है। परिणाम स्वरूप बाजार में उपभोक्ताओं द्वारा इसे पंसद किया जाता है।
  3. वारासिवनी में रेशम मलवरी कोसा टसर की साड़ियों का उत्पादन किया जा रहा है। कोसा टसर की साड़िया छत्तीसगढ़ क्षेत्र के अनुरूप होने से उनकी मांग भी बाजार में धीरे-धीरे बढ़ रहीं है।
  4. वारासिवनी जिला बालाघाट में लगभग 648 करघे स्थापित है। जिनके माध्यम से लगभग 1785 बुनकरो को रोजगार में संलग्न कराया गया है। अनुमानित वार्षिक उत्पादन लगभग 1.89 करोड़ रूपये का है।
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