संत रविदास मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम

मध्यप्रदेश शासन

हमारे बारे में

प्रस्तावना

मध्यप्रदेश शासन के कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के अंतर्गत संत रविदास मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम हस्तशिल्प एवं हाथकरघा सेक्टर में विकासात्मक एवं प्रोत्साहनात्मक गतिविधियों का संचालन करती है। आधुनिकीकरण व वेैश्वीकरण के युग में निगम न सिर्फ जीवन्त धरोहर का संरक्षण करती है वरन् बुनियादी आवश्यकताओं से वंचित स्वरोजगार में लगे शिल्पियों व बुनकरों के लिये रोजगार के अवसर जुटा कर आजीविका के साधन उपलब्ध करवाती है।

दूरदृष्टि

  • मध्यप्रदेश की अद्वितीय धरोहर शिल्प संस्कृति व संवर्द्वन का संरक्षण व रोजगार के अवसर बढ़ाना।
  • प्रदेश के शिल्पियों व बुनकरों हेतु अनुदान पर औजार, तकनीकी-रूपांकन मार्गदर्शन व अधोसंरचना उपलब्ध करवाकर उचित वातावरण तैयार करना जिससे वे अपने पैत्रक व्यवसाय में ही कार्य करते रह कर सम्मानपूर्वक अपनी आजीविका अर्जित कर अपनी परम्परा व संस्कृति का संरक्षण कर सकें।

मिशन

  • ऐसा नेटवर्क विकसित करना जिससे शिल्पियों व बुनकरों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने व ग्राहकों को बिक्री में मदद मिले।
  • बदलते समय, मांग व पसंद के अनुरूप उत्पादन करवाने के लिये शिल्पियों का कौशल उन्नयन व उनके उत्पाद का मूल्य संवर्धन कर उनकी लाभ की मार्जिंन बढ़ाकर हित संवर्धन।
  • अधो संरचना का विकास, कच्चामाल उपलब्धता, रूपांकन, गुणवत्ता नियंत्रण व विपणन सहायता देना जिससे वे आजीविका कमाने के साथ-साथ अपनी आमदनी भी बढ़ा सके।
  • ऐसा वातावरण तैयार करना जिसमें परम्परागत शिल्प शिल्पियों की आजीविका का साधन बन उनकी गरीबी दूर करें। बुनियादी सुविधाओं से वंचित सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछडे़ वर्ग के शिल्पियों व महिलाओं पर विशेष ध्यान।
  • राज्य की शिल्प संस्कृति की जीवन्त धरोहर का संरक्षण- संवर्धन व बढ़ौत्री के लिये शिल्प के इतिहास, परम्परा व उत्पादन प्रक्रिया का अभिलेखीकरण।

उद्देश्य

  • कौशल उन्नयन के लिये प्रशिक्षण, अधोसंरचना का विकास।
  • राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय बाजार की बदलती मांग के अनुरूप उत्पादन बनवाने के लिये तकनीकी व रूपांकन मार्गदर्शन।
  • उत्पादन क्षमता व गुणवत्ता में सुधार के लिये अनुदान पर औजार।
  • विलुप्त हो रहे शिल्पो का संरक्षण व संवर्धन।
  • शिल्प व हाथकरघा परम्परा के इतिहास व परम्परा का अभिलेखीकरण।
  • शिल्पियों व बुनकरों को विपणन सहायता।
  • मूल्य संवर्धन के लिये अनुसंधान व विकास।
  • शिल्पियों में उद्मिता विकास के लिये प्रशिक्षण,स्व सहायता समूहों व उद्यमियों को प्रोत्साहन।
  • रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिये प्राइवेट सेक्टर के साथ मार्केटिंग लिंकेज।

शिल्पकार का विकास

  • प्रशिक्षण - बुनियादी कौशल विकास
  • प्रशिक्षण - कौशल उन्नयन
  • प्रशिक्षण - मास्टर शिल्प व्यक्ति
  • सब्सिडी पर उपकरण