संत रविदास मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम

मध्यप्रदेश शासन

योजनाएं

विकासात्मक योजनाऐं-

एकीकृत क्लस्टर विकास कार्यक्रम योजना 2004 (संशोधित 2011)
नाम-यह नियम एकीकृत क्लस्टर विकास कार्यक्रम हेतु सहायता नियम 2004 कहलाऐंगे।

  • योजना का आच्छादनः- ग्रामोद्योग विभाग के अंतर्गत क्लस्टरों को विशिष्ट बनाना,वर्तमान क्लस्टरें को सुदृढ़ करना तथा नवीन क्लस्टरों को विकसित करना,क्लस्टरों में वित्तीय समर्थन को बढ़ाने हेतु डायग्नोस्टिक स्टडी करना, नवीन एवं आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन एवं विकास, अन्य आवश्यक इनपुट, डिजाइन, बाजार लिंकेज, सलाहकारों की सेवाऐं लेना, कमियों को चिन्हित करने हेतु अध्ययन, प्रशिक्षण की व्यवस्था करना, क्लस्टर में लघु एवं मध्यम उद्यमियों/अशासकीय संस्थाओं को समर्थन देने हेतु सेमीनार, वर्कशाप, अध्ययन भ्रमण आदि का आयोजन करना तथा अन्य हाथकरघा संबंधी गतिविधियों/आवश्यकताओं हेतु सहायता।

    क्लस्टर अंतर्गत बुनियादी आवश्यकता सड़क, नाली, पेयजल, विद्युत प्रदाय, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाऐं, अधोसंरचना, प्री-लूम, पोस्ट लूम सुविधाओं की स्थापना करना।
  • क्रियान्वयन एजेन्सी - शासकीय विभाग, शासकीय एवं अर्द्धशासकीय संस्थाऐं, स्थानीय निकाय/निगम/ बोर्ड, क्लस्टर क्लब एवं राज्य स्तरीय क्लस्टर डेव्लपमेंट सेल।
  • वित्तीय सहायता की मदें-
    • डायग्नोस्टिक स्टडी ऑफ क्लस्टर।
    • उपकरणों का विकास, प्रदर्शन एवं प्रदाय, अन्य तकनीकी इनपुट,डिजाईन, मार्केट लिंकेज, सलहाकारों की सेवाऐं लेना, क्षेत्र संबंधी कमियों का अध्ययन करना तथा उनकी पूर्ति हेतु सहायता।
    • प्रशिक्षण, सेमीनार, तकनीकि एवं बाजार अध्ययन प्रवास हेतु सहायता।
    • सामान्य सुविधा केन्द्र, सड़क, नाली, पेय जल स्त्रोत, विद्युत प्रदाय व्यवस्था/सौर उर्जा संयत्र एवं अन्य अधोसंरचना निर्माण हेतु सहायता देना।
    • विशेषज्ञों/सलाहकारों की सेवाऐं लेने हेतु टी0ए0/डी0ए0 फीस आदि का भुगतान।
    • उद्यमिता तथा प्रबंधकीय क्षमता में विकास हेतु कार्यक्रम आयोजित करना।
    • अन्य critical activity जो क्लस्टर के विकास के लिए आवश्यक हेै।

वित्तीय सहायता की सीमा

1.

डायग्नोस्टिक स्टडी

रु. 0.50 लाख प्रति स्टडी

2

सेमिनार, वर्कशाप तकनीकी बाजार अध्ययन

रु. 1.50 लाख प्रति परियोजना

3

विशेषज्ञों की फीस

रु. 3.00 लाख प्रति परियोजना

4

यात्रा एवं अन्य व्यय

रु. 1.50 लाख प्रति परियोजना

5

टे्रनिंग/टूल उपकरण/डिजाईन/तकनीकि इनपुट

उपकरण हेतु न्यूनतम
प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य, किन्तु संस्थागत एजेन्सियों से प्राप्त विशिष्ट सेवाओं पर यह लागू नहीं होगा।

6

सामान्य सुविधा केन्द्र, सड़क, नाली, पेयजल स्त्रोत/प्रदाय, विद्युत प्रदाय व्यवस्था, स्वास्थ्य एवं शिक्षा एवं अन्य आधारभूत बुनियादी सुविधाओं का निर्माण
critical activity

अधिकृत तकनीकी एजेन्सियों/विशेषज्ञों की प्राक्कलन अनुसार

सहायता स्वीकृति की प्रक्रिया

  • राशि रूपये 10.00 लाख तक की वित्तीय स्वीकृति के अधिकार विभागाध्यक्ष को होंगे। सहायता की द्विरावृत्ति (Duplication) ना हो इस हेतु उक्त स्वीकृति आदेश की प्रति विभागाध्यक्ष/प्रबंध संचालकों को दी जावें।
  • राशि रूपये 10.00 लाख से अधिक के प्रस्तावों का परीक्षण आयुक्त, हाथकरघा एवं हस्तशिल्प, संचालक, रेशम, प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एंव हाथकरघा विकास निगम एवं प्रबंध संचालक, खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड की संयुक्त छानबीन समिति द्वारा की जाकर यह प्रमाणित किया जाएगा कि सहायता स्वीकृति हेतु प्रस्तुत प्रस्ताव में शामिल हितग्राही गतिविधियां की अन्य घटक के प्रस्तावों की द्विरावृत्ति (Duplication) नहंीं हुई है। प्रस्तावों की स्वीकृत राज्य स्तरीय सशक्त समिति द्वारा दी जावेगी जिसके अध्यक्ष प्रमुख सचिव, कुटीर एवं ग्रामोद्योग होंगे तथा सदस्य विभाग प्रमुख एवं घटको के प्रबंध संचालक सदस्य होंगे। समिति की स्वीकृति उपरांत स्वीकृति कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के संबंधित घटक के विभागाध्यक्ष द्वारा जारी की जावेगी।

योजना के क्रियान्वयन का मॉनिटरिंग

  • परियोजना के क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग राज्य स्तरीय स्टेयरिंग कमेटी द्वारा विभागाध्यक्ष/बोर्ड/निगम स्तर पर संबंधित घटक द्वारा तथा जिला स्तर पर एक अंर्तविभागीय समिति द्वारा किया जावेगा जिसमें कलेक्टर, कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग तथा संबंधित विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी सदस्य होंगे। समिति द्वारा योजना के क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग के साथ-साथ समय-समय पर बाह्य एजेन्सी से मूल्यांकन (impact assessment ) कराया जावेगा।
  • ग्रामोद्योगो के ''प्रमोशन एवं अभिलेखीकरण'' योजना हेतु नियम 2004 (संशोधित 2011)

    नाम-यह योजना कुटीर एवं ग्रामोद्योग से संबंधित उद्योगों के प्रमोशन एंव अभिलेखीकरण की योजना कहलाएगी। इसके अंतर्गत निम्न नियम होंगे-

    • योजना का आच्छादन- प्रदेश के कुटीर एवं ग्रामोद्योग से संबंधित उत्पादों की लोकप्रियता बढ़ाने तथा विकास कार्यो का अभिलेखीकरण जिसमें डिजाईन डिक्शनरी प्रकाशन, बोशर, प्रिंटिंग, परियोजना प्रतिवेदन, इलेक्ट्रिानिक मिडिया का उपयोग तथा बेस्ट प्रेक्टिसेस आदि के अभिलेखीकरण हेतु सहायता दी जावेगी।
    • क्रियान्वयन एजेन्सी - निगम, अशासकीय संस्थाऐं, शासकीय संस्थाऐं, हाथकरघा क्लस्टर क्लब एवं राज्य स्तरीय क्लस्टर डेव्लपमेंट सेल आदि।

    वित्तीय सहायता की मदे

    • ब्रोशर आदि प्रकाशन सामग्री की प्रिटिंग।
    • डिजाईन सी0डी0/फिल्म आदि के निर्माण।
    • डायग्नोस्टिक स्टेडी/रिपोर्ट तैयार करना।
    • इलेक्ट्रिानिक/प्रिंट मिडिया के माध्यम से प्रचार प्रसार।
    • बेस्ट प्रेक्टिसेस के अभिलेखीकरण।
    • हाथकरघा, हस्तशिल्प, रेशम एवं खादी की परम्परा का अभिलेखीकरण।

    सहायता की सीमाऐं

    यह सहायता प्रोजेक्ट आधारित होगी। सहायता की अधिकतम सीमा राज्य स्तरीय स्टेयरिंग कमेटी के विवेकाधीन होगी।

    सहायता सवीकृति की प्रक्रिया

    • योजना में वित्तीय स्वीकृति के अधिकार अंतर्गत राशि रूपये 10.00 लाख के अधिकार कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के विभिन्न घटकों के विभागाध्यक्ष को होंगे।
    • रूपये 10.00 लाख के अधिक के प्रस्ताव कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के विभिन्न घटकों के विभागाध्यक्षों के द्वारा राज्य स्तरीय स्टेयरिंग कमेटी को प्रस्तुत किए जावेंगे। राज्य स्तरीय स्टेयरिंग समिति के अध्यक्ष प्रमुख सचिव, कुटीर एवं ग्रामोद्योग होंगे। विभाग प्रमुख तथा घटकों के प्रबंध संचालक सदस्य होंगे। समिति की अनुमोदन उपरान्त प्रस्ताव में स्वीकृति संबंधित ग्रामोद्योग घटकों के विभागाध्यक्षों द्वारा जारी की जावेगी।

    योजना के क्रियान्वयन के क्रियान्वयन का मॉनिटरिंग

    स्वीकृति सहायता की मॉनिटरिंग कुटीर एवं ग्रामोद्योग के संबंधित घटक एवं राज्य स्तरीय स्टेयरिंग कमेटी द्वारा की जावेगी।

    स्पेशल प्रोजेक्ट योजना हेतु नियम 2004 (संशोधित 2011)

    नाम -यह नियम ग्रामोद्योग के स्पेशल प्रोजेक्ट हेतु सहायता नियम 2004 कहलाऐंगे।

    • योजना का आच्छादन- हाथकरघा, हस्तशिल्प, रेशम एवं खादी क्षेत्र के विशेष उद्देश्यों की पूर्ति के लिए राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप अंतर्गत निजी इकाईयों, कम्पनियों एंव व्यक्तिगत उद्यमियों द्वारा परियोजना का क्रियान्वयन।
    • क्रियान्वयन एजेन्सी-राज्य स्तरीय/राष्ट्रीय निगम मंडल, शासकीय संस्थाऐं एवं अंतराष्ट्रीय अशासकीय संस्थाऐं, निजी इकाईया/कम्पनी/व्यक्तिगत उद्यमी।
    • वित्तीय सहायता की मदे
      • यह सहायता प्रोजेक्ट आधारित होगी।
      • प्रोजेक्ट सहायता, हाथकरधा, हस्तशिल्प, रेशम एवं खादी से संबंधित विभिन्न मदों जैसे विपणन, स्वास्थ्य, रंगाई, डायवर्सिफिकेशन ऑफ प्रोडक्ट इत्यादि पर आधारित होगी। परन्तु सक्षम वित्तीय समिति यदि हाथकरघा, हस्तशिल्प,रेशम एवं खादी से संबंधित किसी विशेष प्रयोजन हेतु सहायता देना चाहे तो उक्त प्रोजेक्ट पर स्वीकृति हेतु विचार कर सकेगी।
      • परियोजना के क्रियान्वयन हेतु कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के घटकों द्वारा संबंधित संस्थाओं के साथ एम.ओ.यू. का निष्पादन किया जावेगा। प्रोजेक्ट की उपलब्धियों का अभिलेखीकरण किया जावेगा।

    सहायता की सीमा

    • प्रोजेक्ट राशि का अधिकतम 70 प्रतिशत राशि राज्य शासन द्वारा तथा कम से कम 30 प्रतिशत राशि क्रियान्वयन संस्था द्वारा वहन किया जायेगा।
    • यह सहायता सक्षम वित्तीय समितियों (एस.एफ.सी.) के विवेकाधीन होंगी।

    सहायता स्वीकृति की प्रक्रिया

    परियोजना प्रस्ताव कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के संबंधित घटक जिसके द्वारा राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ साझेदारी में योजना क्रियान्वित की जाना है, संबंधित घटक के मुुखय कार्यपालन अधिकारी द्वारा राज्य स्तरीय समिति को प्रस्तुत की जाएगी। सभी परियोजना प्रस्तावों में स्वीकृति सक्षम वित्तीय समितियों (एस.एफ.सी.) द्वारा दी जावेगी। समिति के अनुमोदन उपरांत प्रस्ताव में स्वीकृति संबंधित कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के घटक के मुखय कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी की जावेगी।

    योजना के क्रियान्वयन का मॉनिटरिंग

    परियोजना के क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग राज्य स्तर पर राज्य स्तरीय स्टेयरिंग कमेटी द्वारा, विभागाध्यक्ष/बोर्ड/निगम स्तर पर संबंधित घटक द्वारा तथा जिला स्तर पर कलेक्टर द्वारा किया जावेगा।

    उद्यमियों/स्व-सहायता समूहों/अशासकीय संस्थाओं को सहयोग के लिये नियम (संशोधित 2011)

    नाम - यह नियम उद्यमियों/स्व-सहायता समूहों/अशासकीय संस्थाओं को सहयोग के लिये नियम 2004 कहलाएंगे।

    • योजना का आच्छादन- हाथकरघा, हस्तशिल्प, रेशम तथा खादी से संबंधित इकाईयों में संबंध व्यक्तियों उद्यमियों, स्व-सहायता समूहों एवं अशासकीय संस्थाऐं इत्यादि को नवीन एवं कौशल उन्नयन प्रशिक्षण, डिजाईन विकास, उत्पाद परिवर्तन, विपणन एवं निर्यात से जुड़ी हुई गतिविधियों के उत्थान के लिए सहायता।
    • क्रियान्वयन एजेन्सी- सहकारी समितियां, इकाईयों, उद्यमी अथवा स्व-सहायता समूह, अशासकीय संगठन। केवल वे ही संस्थाऐं योजना में सहायता के पात्र होंगे जिनका कार्यक्षेत्र में मध्यप्रदेश शामिल हो उनके उद्देश्य में ग्रामोद्योग सेक्टर में हाथकरघा, हस्तशिल्प, रेशम एवं खादी उद्योग से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देने का उल्लेख हो।
    • वित्तीय सहायता की मदे
      • बुनियादी एवं उन्नत प्रशिक्षण।
      • उत्पाद परिवर्तन, विकास हेतु सहायता, सेम्पल, डिजाईन क्रय, उनका, डिजाईनर की सवायें, लेने हेतु फीस, यात्रा एवं अन्य व्यय का भुगतान।
      • उन्नत उपकरण हेतु सहायता।
      • नवीन उत्पादों/विकसित उत्पादों की टेस्ट मार्केटिंग हेतु प्रदर्शनी आदि के आयोजन हेतु सहायता।
      • हाथकरघा, हस्तशिल्प उत्पादों के विपणन को प्रोत्साहन हेतु प्रदेश व प्रदेश के बाहर मेला प्रदर्शनी आयोजन हेतु सहायता।
      • निर्यात बाजारों की खोज हेतु सेम्पल तैयार करने, उनके प्रदर्शन, आने-जाने ठहरने,स्टाल रेंट हेतु सहायता।
      • प्रदेश के बाहर देश के भीतर आयोजित विभिन्न एक्सपो/मेला प्रदर्शनी आदि को माल के परिवहन तथा दो व्यक्तियों के आने जाने के किरायें, स्टाल रेंट हेतु सहायता।
      • क्रेता-विक्रेता सम्मेलन के आयोजन तथा राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित क्रेता-विक्रेता सम्मेलनों में भागीदारी हेतु सहायता।
      • अन्य मदें जो राज्य स्तरीय समिति उचित एवं आवश्यक समझें।

    वित्तीय सहायता की सीमा

    • रेशम रीलिंग टि्वस्टिंग एंव स्पिनिंग (इरी, मलवरी, टसर) के लिए नवीन प्रशिक्षण अधिकतम 20 हितग्राहियों के दल को 6 माह के हितग्राहियों के दल को 6 माह के प्रशिक्षण हेतु छात्रवृत्ति रूपये 500/- प्रतिमाह, प्रशिक्षक का मानदेय रूपये 5000/- प्रतिमाह, कच्चा माल रूपये 200/- प्रति हितग्राही प्रतिमाह अन्य प्रशासकीय व्यय परियोजना लागत का लगभग 5 प्रतिशत राशि रूपये 1.20 लाख अधिकतम 20 हितग्राहियों को प्रशिक्षण हेतु। प्रशिक्षण उपरान्त प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार में लगवाने की जिम्मेदारी संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी की होगी।
    • नवीन प्रशिक्षण न्यूनतम 10 हितग्राहियों के दल को 6 माह के प्रशिक्षण हेतु छात्रवृत्ति रूपये 500/- प्रतिमाह, प्रशिक्षक का मानदेय रूपये 5000/- प्रतिमाह, कच्चामाल रूपये 200/- प्रति हितग्राही प्रतिमाह, विविध व्यय रूपये 100/- प्रतिमाह प्रति हितग्राही रूपये 0.78 लाख प्रति 10 हितग्राहियों को प्रशिक्षण हेतु। प्रशिक्षण उपरान्त प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार में लगवाने की जिम्मेदारी संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी की होगी।
    • उन्नत प्रशिक्षण न्यूनतम 10 हितग्राहियों के बैच को 3 माह तक के प्रशिक्षण हेतु छात्रवृत्ति रूपये 750/- प्रतिमाह, प्रशिक्षक का मानदेय रूपये 7500/- प्रतिमाह, कच्चा माल रूपये 400/-प्रति हितग्राही प्रतिमाह डिजाईन क्रय रूपये 300/- प्रति हितग्राही। रूपये 0.60 लाख प्रति 10 हितग्राहियों के उन्नत प्रशिक्षण हेतु।
    • सेम्पल डिजाईन क्रय, उनके उत्पादन तथा विशेषज्ञों की सेवाऐं लेने हेतु रूपये 1.00 लाख।
    • नवीन उत्पादन की टेस्ट मार्केटिंग हेतु (दो प्रदर्शनियों के लिए) रूपये 1.00 लाख।
    • मेला प्रदर्शनी एवं क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन।
      • प्रदेश के जिला व संभाग स्तर पर आयोजन हेतु - रूपये 0.50 लाख
      • प्रदेश के महानगरों के आयोजन हेतु - रूपये 1.00 लाख
      • प्रदेश के बाहर महानगरों के आयोजन हेतु - रूपये 1.50 लाख
    • प्रदेश के बाहर मेला प्रदर्शनी एवं क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में भागीदारी हेतु माल परिवहन हेतु 2 व्यक्तियों के आने-जाने का स्लीपर क्लास या बस का न्यूनतम किराया, स्टाल रेंट आदि हेतु अधिकतम रूपये 30,000/-
    • निर्यात प्रदर्शनी हेतु सेम्पल स्टाल रेंट व आने-जाने हेतु एक प्रदर्शनी हेतु अधिकतम ` 2.00 लाख अथवा वास्तवकि खर्च का 75 प्रतिशत जो भी कम हो।
    • अधोसंचरना हेतु सहायता- यदि क्रियान्वयन एजेंसी के पास अपने हाथकरघा, हस्तशिल्प, रेशम एवं खादी उद्योग संचालन हेतु पर्याप्त भवन उपलब्ध नहीं है, ऐसी स्थिति में यदि क्रियान्वयन एजेन्सी के पास निजी स्वामित्व की भूमि उपलब्ध है तब शासकीय एजेंसी के प्राकलन के आधार पर अधोसंरचना हेतु सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी। नवीन निर्माण हेतु सामान्य सुविधा केन्द्र/कर्मशाला निर्माण/रंगाई घर के निर्माण संबंधी कार्यो के लिए एक बार अधिकतम राशि ` 5.00 लाख स्वीकृत की जावेगी तथा इसी प्रकार पूर्व से निर्मित सामान्य सुविधा केन्द्र/कर्मशाला निर्माण/रंगाई घर की मरम्मत हेतु अधिकतम राशि ` 2.00 लाख स्वीकृत की जावेगी, जिसमें स्वीकृति का स्वरूप SHH/SMG/NGO प्राथमिक बुनकर सह समितियां/उद्यमी को अधिकतम अनुदान 75 प्रतिशत स्वीकृत किया जावेगा। शेष 25 प्रतिशत राशि संबंधित इकाई द्वारा अपने अंश के रूप में विनियोजित की जावेगी। (स्थाई वित्तीय समिति की बैठक दिनांक 13.08.2010 में अनुशंसित)
    • उन्नत उपकरण- सामान्य वर्ग को 50 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति/जनजाति को 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जायेगा। उपरोक्त अनुदान राशि के अतिरिक्त शेष राशि आवेदक/संस्था/हितग्राही/स्व-सहायता समूह द्वारा जमा करने पर सहायता देय होगी। यथाः-
      • करघे (फ्रेमलूम, पिटलूम, तारालूम व अन्य उन्नत करघे) 36'' से 120'' तक 12,000/-
      • जेकार्ड (120 हुक से 600 हुक ब्राडेंड) अन्य सहायक उपकरण जैसे हील्ड, हार्नस आदि 8,000/-
      • रंगाई एवं प्रोससिंग उपकरण - 5000/-
      • हस्तशिल्पियों को हैण्ड ब्लाक एवं अन्य आवश्यक उपकरण क्रय करने हेतु सहायता- रू.8,000/- प्रति हितग्राही।
      • रेशम रीलिंग, टि्वस्टिंग एंव स्पिनिंग से संबंधी उपकरण इत्यादि।
      • अन्य व्यवस्थाऐं जो परियोजना की आवश्यकता अनुसार राज्य स्तरीय को-आर्डिनेशन कमेटी उचित समझे।
      • सहायता स्वीकृति की प्रक्रिया

        • आयुक्त, हाथकरघा या हस्तशिल्प विकास निगम या मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड या संचालक, रेशम को प्रस्तुत किए जाऐंगे।
        • प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण आयुक्त, हाथकरघा एवं हस्तशिल्प एवं प्रबंध संचालक, हस्तशिल्प विकास निगम तथा प्रबंध संचालक, खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड संचालक, रेशम की संयुक्त छानबीन समिति द्वारा की जाकर यह प्रमाणित किया जाएगा कि सहायता स्वीकृति हेतु प्रस्तुत प्रस्ताव में शामिल हितग्राही एवं गतिविधियों कि अन्य घटक के प्रस्तावों की द्विरावृत्ति (Duplication)नहीं हुई है।
        • रूपये 10.00 लाख तक के प्रस्तावों की स्वीकृति संबंधित घटक के मुखय कार्यपालन अधिकारी द्वारा की जाएगी। रूपये 10.00 लाख से अधिक के प्रस्ताव में स्वीकृति राज्य स्तरीय सशक्त समिति द्वारा दी जाएगी। जिसका अध्यक्ष प्रमुख सचिव, कुटीर एवं ग्रामोद्योग होंगे तथा विभागाध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक सदस्य होंगे। समिति के स्वीकृति उपरांत प्रस्ताव में आदेश संबंधित कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के घटक के मुखय कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी किए जावेंगे।

        अनुसंधान एवं विकास योजना (संशोधित 2011)

        नाम - यह योजना अनुसंधान एवं विकास योजना कहलाएगी।
        क्रियान्वयन एजेंसी- शासकीय एवं अर्द्वशासकीय संस्थाए, सहाकारी समितियां इकाई एवं स्व-सहायता समूह, क्लस्टर क्लब एवं क्लस्टर डव्लपमेंट रोल।

        • योजना का आच्छादन- हाथकरघा, हस्तशिल्प, रेशम एवं खादी से संबंधित इकाईयों को क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास कार्य संपादित करने हेतु अध्ययन एवं मूल्यांकन (इम्पेक्ट एसेसमेंट) हेतु नीतियों के क्रियान्यन का व्यावसायिक तथा विशेषज्ञ संस्थाओं से अध्ययन/विश्लेषण कार्य कराए जाने हेतु सहायता दी जा सकती है।

        वित्तीय सहायता की मदें

        • शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओं के ऐसे वस्त्र तकनीकि विशेषज्ञों का बुलाने के लिए जो उत्पाद के लिए नवीन तकनीकि परिवर्तन की सलाह दे सकें।
        • करघों, उपकरणों एवं धागों में सुधार हेतु अनुसंधान के लिए।
        • धागों एवं बुनाई पर अनुसंधान के लिए।
        • उत्पादकता, गुणवत्ता, डयूरेविलिटी एवं विपणन के लिए।
        • प्राकृतिक रंगाई/छपाई के विकास के लिए, ताकि निर्यात बाजार में प्रवेश कर सकें।
        • डिजाईन विकास के लिए कच्चा माल, बुनाई मजदूरी, रंगाई एवं डिजाईनर के व्यय हेतु सहायता।
        • बुनकर, शिल्पियों के कार्य क्षेत्र में सुधार तथा उत्पादन प्रक्रिया में सुधार हेतु।
        • उत्पादों के विभिन्न प्रकारों में प्रमाणीकरण हेतु अनुसंधान हेतु।
        • हाथकरघा, हस्तशिल्प, रेशम तथा खादी से संबंधित लुप्त-प्रायः कला/कौशल को पुर्नजीवित करने हेतु सहायता।

        वित्तीय स्वीकृति के अधिकार

        उपरोक्त वर्णित मदों में राशि रूपये 10.00 लाख तक के अधिकार विभागाध्यक्ष को होंगे। रूपये 10.00 लाख से अधिक राशि के प्रस्ताव की स्वीकृति के अधिकार राज्य स्तरीय स्टेयरिंग कमेटी को होंगे, जिसके अध्यक्ष प्रमुख सचिव, कुटीर एवं ग्रामोद्योग होंगे तथा विभागाध्यक्ष एवं घटकों के प्रबंध संचालक सदस्य होंगे। समिति की स्वीकृति उपरांत प्रस्ताव में आदेश संबंधित कुटीर एवं ग्रामोद्योग के घटक के विभागाध्यक्ष द्वारा जारी किए जावेंगे।

        विपणन सहायता

        शिल्पियों व बुनकरों के लिए सबसे प्रमुख समस्या विपणन की होती है। शिल्पियों के उत्पाद के विक्रय के लिए निगम द्वारा 23 एम्पोरियम संचालित किए जा रहे है, जिनमें से 10 प्रदेश के बाहर है। भोपाल, इन्दौर व ग्वालियर में स्थाई अर्बन हाट की स्थापना की गई है। विपणन सहायता निम्नप्रकार दी जाती है-

        • अ) निगम की क्रय -विक्रय क्षमता शिल्प की गुणवत्ता बाजार में एवं मांग के अनुरूप तैयार शिल्प का क्रय।
        • ब) शासकीय प्रदाय के लिए ऐसोसिएट बुनकरों को सूत बिक्री कर वांछित गुणवत्ता के अनुरूप तैयार माल क्रय करना।
        • स) बाजार की मांग के अनुरूप डिज़ाइन देकर एसोसिएट बुनकर संस्थाओं/बुनकरों से तैयार माल का क्रय।
        • द) शिल्पियों को प्रदर्शनियों में सीधे बिक्री करने का अवसर प्रदान करना।

        प्रदर्शनी प्रचार प्रसार

        प्रदेश के शिल्पों व हाथकरघा वस्त्रों की बिक्री के लिए निगम द्वारा देशभर में प्रदर्शनियां आयोजित की जाती है। इन प्रदर्शनियों में शिल्पियों/बुनकरों का सीधा सम्पर्क ग्राहकों से होता है। उन्हें ग्राहकों की पसन्द का ज्ञान होता है व डायरेक्ट मार्केट लिंकेज मिलता है।

        विश्वकर्मा पुरस्कार

        शिल्पियों द्वारा जीविकार्जन के लिए व्यवसायिक उत्पादन कराने के कारण शिल्प की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है। शिल्पियों को कलात्मक उत्पादन के लिए प्रेरित करने हेतु चयनित शिल्पियों को विश्वकर्मा पुरस्कार से प्रतिवर्ष सम्मानित किया जाता है। प्रथम पुरस्कार रूपये 1.00 लाख, द्वितीय पुरस्कार रूपये 50,000/- व तृतीय पुरस्कार रूपये रूपये 25,000/- है। इसके अतिरिक्त लुप्तप्राय शिल्पों में कलात्मक सृजन के लिए रूपये 15,000/- के अधिकतम 3 पुरस्कारों की व्यवस्था है।