मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोघोग बोर्ड

मध्यप्रदेश शासन का उपक्रम

योजनाएं

1. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग मुम्बई ( सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा संचालित इस योजना की क्रियान्वयन एजेंसी मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड है।

  • नए स्वरोजगार उद्यमों/परियोजनाओं/सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का सृजन करना ।
  • व्यापक रूप से दूर-दूर अवस्थित परम्परागत कारीगरों/ग्रामीण और शहरी बेरोजगार युवाओं को एक साथ लाना और जहां तक संभव हो, स्थानीय स्तर पर ही उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करना ।
  • देश के परम्परागत और संभावित कारीगरों, ग्रामीण तथा शहरी बेरोजगार युवाओं को निरंतर और दीर्घकालिक रोजगार उपलब्ध कराना ताकि ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर उनका पलायन रोका जा सके ।
  • कारीगरों की पारिश्रमिक अर्जन क्षमता बढ़ाना और ग्रामीण तथा शहरी रोजगार की विकास दर बढ़ाने में योगदान करना ।
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2. मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना

शासन द्वारा मुख्यमंत्री कारीगर स्वरोजगार योजना के स्थान पर दिनांक 1 अगस्त, 2014 से मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का संचालन प्रारंभ किया गया । समाज के सभी वर्गों के लिये स्वयं का उद्योग(विनिमार्ण)/सेवा/व्यवसाय स्थापित करने हेतु बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराना । आर्थिक सहायता - सामान्य वर्ग हेतु परियोजना लागत का 15 प्रतिशत (अधिकतम रू. एक लाख), बी.पी.एल./अनुजाति/अनु.जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग(क्रीमीलेयर का छोड़कर)/महिला/अल्पसंख्यक/निःशक्त जन हेतु 30 प्रतिशत(अधिकतम रू. दो लाख) परियोजना लागत पर 5 प्रतिशत की दर से (अधिकतम रू. 25 हजार प्रतिवर्ष) ब्याज अनुदान अधिकतम 7 वर्षों तक देय होगा ।

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3. मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना

योजना का उद्देश्य समाज के सभी वर्गो के लिए स्वयं का उद्योग (विनिर्माण/सेवा) स्थापित करने हेतु बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराना है । योजना में आर्थिक सहायता प्राप्त किये जाने हतु आवेदक मध्यप्रदेश का मूल निवासी हो, गरीबी रेखा की सूची में नाम शामिल हो एवं आयु 18 से 55 वर्ष के मध्य हो। योजना के अंतर्गत परियोजना लागत अधिकतम रूपये 50,000/- जिसमें 50 प्रतिशत राशि अधिकतम रूपये 15,000/- अनुदान का प्रावधान है।

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4. कौशल उन्नत कार्यक्रमों का संचालन

बेरोज़गार युवाओ एवं अल्पकालीन रोज़गार प्राप्त हितग्राहीयो को खादी ग्रमोद्योग , रेशम ,हस्तशिल्प ,हाथकरघा ,कटिकला एवं संबन्ध गतिविधियों (एडीशनल स्किल व एलाइट वर्क ) में कौशल विकास के लिए उन्नत प्रक्षिक्षण देना।

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बोर्ड द्वारा संचालित योजनाऐं

1. बोर्ड के अमले को तकनीकी प्रशिक्षण :

बोर्ड के अधिकारी/कर्मचारियों को समय-समय पर कार्यालयीन व्यवस्था,कम्प्युटर कार्य, सूचना का अधिकार, विपणन, लेखा एवं व्यवस्थित तरीके से नियमानुसार कार्यालयीन कार्य निष्पादन के लिये विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता है।

2. अनुसंधान एवं विकास हेतु सहायता:

बोर्ड द्वारा अपने विभागीय केन्द्रों में उत्पादित सामग्री को और अधिक आकर्षण एवं मांग के अनुरूप बनाने की दृष्टि से निरंतर अनुसंधान विकास का कार्य किया जाता है।

3. कौशल उन्नयन विकास कार्यक्रम:

बेरोजगार युवाओं/अल्प-कालिक रोजगार प्राप्त कृषि संबद्ध मजदूरों को कुटीर एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हस्तशिल्प व एलाईड गतिविधियों में कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण ।

4. उत्पादन तथा कत्तिन अनुदान:

प्रदेश में खादी उत्पादन को प्रोत्साहित करने एवं कत्तिनों को कताई कार्य हेतु प्रोत्साहित करने के उद्ेद्श्य से इस योजनान्तर्गत कत्तिनों को अतिरिक्त श्रमिकाई का भुगतान किया जाता है, ताकि खादी के क्षेत्र में उनकी रूचि बनी रहे।

विपणन एवं प्रचार-प्रसार

5. विपणन सहायता:

बोर्ड द्वारा प्रदेश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों/ विभागीय केन्द्रों द्वारा खादी तथा ग्रामोद्योगों के तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराकर विपणन सुविधा दी जाती है । इसके अंतर्गत मेले, प्रदर्शनियों मंे भाग लेना, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, प्रचार-प्रसार एवं सामग्री का तत्काल भुगतान करना सम्मिलित है, ताकि उत्पादन कार्य प्रभावित न हो।

6. प्रचार-प्रसार:

बोर्ड द्वारा खादी तथा ग्रामोद्योगों का विकास एवं संवर्धन करने के उद्देश्य से चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं का प्रभावशाली ढंग से प्रचार-प्रसार विभिन्न माध्यमों (आकाशवाणी, दूरदर्शन, प्रेस, मीडिया, भेंट वार्ताओं का आयोजन एवं मेले प्रदर्शनियों में भाग लेकर प्रत्यक्ष प्रदर्शन आदि) से किया जाता है ताकि जनमानस को इस क्षेत्र की गतिविधियों की पूर्ण जानकारी प्राप्त हो सकें एवं उनका प्रचार-प्रसार हो सके ।

ग्रामोद्योग गतिविधियों को संचालन एवं संर्वधन

7. अधोसंरचना विकास सहायता:

इस मद की राशि का अधिकाधिक उपयोग उत्पादन केन्द्रों की व्यवस्था को सुदृढ़ करने में किया जाता है, ताकि इस क्षेत्र में लगे कत्तिनों, बुनकरों एवं कारीगरों को निरंतर रोजगार प्राप्त हो सके एवं उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि होने से उनकी आय में भी वृद्धि हो सके। अधोसंरचना अंतर्गत प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग उत्पादन से संबंधित एडिशन- अलट्रेशन, कम्प्यूटरीकरण, रिपेयरिंग आदि हेतु किया जाता है।

8. एकीकृत कलस्टर विकास कार्यक्रम:

किसी उद्योग विशेष या क्षेत्र विशेष में कलस्टर के रूप में ग्रामोद्योगों की स्थापना से उद्योग/क्षेत्र का विकास व्यवस्थित एवं योजनाबद्ध तरीके से किया जा सकता है।

9. प्रमोशन एवं अभिलेखीकरण की योजना:

प्रदेश के ग्रामोद्योग उत्पादों की लोकप्रियता बढ़ाने तथा विकास कार्यो का अभिलेखीकरण जिसमें डिजाईन डिक्शनरी प्रकाशन, ब्रोशर प्रिटिंग, परियोजना प्रतिवेदन, इलेक्ट्राॅनिक मीडिया का उपयोग तथा बेस्ट प्रेक्टिसेस आदि के अभिलेखीकरण की व्यवस्था है।

10. उद्यमियों/स्व-सहायता समूहों एवं अशासकीय संस्थाओं को सहयोग:

खादी तथा ग्रामोद्योग से सम्बद्ध व्यक्तियों, उद्यमियों, स्व-सहायता समूहों एवं अशासकीय संस्थाओं आदि को नवीन एवं कौशल उन्नयन प्रशिक्षण,डिजाईन विकास, उत्पादन परिवर्तन, विपणन एवं निर्यात से जुड़ी हुई गतिविधियों की सहायता के लिये योजना का संचालन किया जाता है ।

11. सूचना प्रौद्योगिकी:

सूचना प्रौद्योगिकी के अन्तर्गत बोर्ड की विकासात्मक गतिविधियों, बजट प्रावधान एवं लेखों को अद्यतन करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना । सूचना प्रौद्योगिकी के द्वारा जिला पंचायत कार्यालय, विभागीय केन्द्रों को इन्टरनेट के माध्यम से जोड़कर उत्पादन विक्रय एवं रोजगार की जानकारी के साथ-साथ बजट के उपयोग पर भी नियंत्रण रखा जाना । डाटा बेस तैयार करने एवं योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकाधिक उपयोग ।

12. कच्चा माल सहायता:

खादी एवं ग्रामोद्योग के उत्पादन केन्द्रों द्वारा कच्चा माल क्रय कर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग ग्रामीण हितग्राहियों, दस्तकारों को भी प्रदाय किया जाता है, ताकि उत्पादन में निरन्तर वृद्धि हो और हितग्राहियों को नियमित रोजगार सुलभ हो सके।