मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोघोग बोर्ड

मध्यप्रदेश शासन का उपक्रम

योजनाएं

1. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग मुम्बई ( सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा संचालित इस योजना की क्रियान्वयन एजेंसी मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड है।

  • नए स्वरोजगार उद्यमों/परियोजनाओं/सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का सृजन करना ।
  • व्यापक रूप से दूर-दूर अवस्थित परम्परागत कारीगरों/ग्रामीण और शहरी बेरोजगार युवाओं को एक साथ लाना और जहां तक संभव हो, स्थानीय स्तर पर ही उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करना ।
  • देश के परम्परागत और संभावित कारीगरों, ग्रामीण तथा शहरी बेरोजगार युवाओं को निरंतर और दीर्घकालिक रोजगार उपलब्ध कराना ताकि ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर उनका पलायन रोका जा सके ।
  • कारीगरों की पारिश्रमिक अर्जन क्षमता बढ़ाना और ग्रामीण तथा शहरी रोजगार की विकास दर बढ़ाने में योगदान करना ।
विस्तार से देखें

2. मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना

ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जीवन यापन करने वाले कारीगर/शिल्पियों/उधमियों को स्वयं का रोजगार स्थापित करने एवं विपणन हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना।

विस्तार से देखें

3. कारीगर प्रशिक्षण योजना

प्रदेश में निवासरत परम्परागत/गैर परम्परागत हितग्राहियों को स्वयं के रोजगार स्थापना के पूर्व, प्रशिक्षण प्रदाय कर कौशल उन्नयन/तकनीकी दक्षता का विकास कराना ।

विस्तार से देखें

अन्य योजनाएं/कार्यक्रम

1. खादी उत्पादन पर रिबेट:-

प्रदेश में खादी उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से खादी वस्त्रो के उत्पादन पर रिबेट/अनुदान योजना प्रारंभ की गई है। प्रदेश में खादी उत्पादन कार्य बोर्ड द्वारा संचालित केन्द्रों एवं आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त खादी संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है। प्रदेश में उत्पादित खादी के उत्पादन मूल्य का 10 प्रतिशत उत्पादन अनुदान दिया जाता है।

2. कत्तिन अनुदान (स्पिनिंग हेतु सहायता):

प्रदेश में खादी उत्पादन को प्रोत्साहित करने एवं कत्तिनों को कताई कार्य हेतु प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इस योजनान्तर्गत कत्तिनों को अतिरिक्त श्रमिकाई का भुगतान किया जाता है, ताकि खादी के क्षेत्र में उनकी रूचि बनी रहे।

3. कच्चा माल सहायता:

खादी एवं ग्रामोद्योग के उत्पादन केन्द्रों द्वारा कच्चा माल क्रय कर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग ग्रामीण हितग्राहियों, दस्तकारों को भी प्रदाय किया जाता है, ताकि उत्पादन में निरन्तर वृद्धि हो और हितग्राहियों को नियमित रोजगार सुलभ हो सके।

4. प्रचार-प्रसार:

बोर्ड द्वारा खादी तथा ग्रामोद्योगों का विकास एवं संवर्धन करने के उद्देश्य से चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं का प्रभावशाली ढ़ंग से प्रचार-प्रसार विभिन्न माध्यमों (आकाशवाणी, दूरदर्शन, प्रेस, मीडिया, भेंटवार्ताओं का आयोजन एवं मेले प्रदर्शनियों में भाग लेकर प्रत्यक्ष प्रदर्शन आदि) से किया जाता है ताकि जनमानस को इस क्षेत्र की गतिविधियों की पूर्ण जानकारी प्राप्त हो सकें एवं उनका प्रचार-प्रसार हो सके।

5. विपणन सहायता:

बोर्ड द्वारा प्रदेश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों/ विभागीय केन्द्रों द्वारा खादी तथा ग्रामोद्योगों के तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराकर विपणन सुविधा दी जाती है। इसके अंतर्गत मेले, प्रदर्शनियों मै भाग लेना, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, प्रचार-प्रसार एवं सामग्री का तत्काल भुगतान करना सम्मिलित है।

6. अधोसंरचना विकास सहायता:

इस मद की राशि का अधिकाधिक उपयोग उत्पादन केन्द्रों की व्यवस्था को सुदृढ़ करने में किया जाता है, ताकि इस क्षेत्र में लगे कत्तिनों, बुनकरों एवं कारीगरों को निरंतर रोजगार प्राप्त हो सके एवं उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि होने से उनकी आय में भी वृद्धि हो सके। अधोसंरचना अंतर्गत प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग उत्पादन से संबंधित एडिशन- अलट्रेशन, कम्प्यूटरीकरण, रिपेयरिंग आदि हेतु किया जाता है। 

7. एकीकृत कलस्टर विकास कार्यक्रम:

किसी उद्योग विशेष या क्षेत्र विशेष में कलस्टर के रूप में ग्रामोद्योगों की स्थापना से उद्योग/क्षेत्र का विकास व्यवस्थित एवं योजनाबद्ध तरीके से किया जा सकता है।

8. खादी तथा ग्रामोद्योग उत्पादन के प्रमोशन एवं अभिलेखीकरण की योजना:

प्रदेश के ग्रामोद्योग उत्पादों की लोकप्रियता बढ़ाने तथा विकास कार्यो का अभिलेखीकरण जिसमें डिजाईन डिक्शनरी प्रकाशन, ब्रोशर प्रिटिंग, परियोजना प्रतिवेदन, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का उपयोग तथा बेस्ट प्रेक्टिसेस आदि के अभिलेखीकरण की व्यवस्था है।

9. उद्यमियों/स्व-सहायता समूहों एवं अशासकीय संस्थाओं को सहयोग:

खादी तथा ग्रामोद्योग से सम्बद्ध व्यक्तियों, उद्यमियों, स्व-सहायता समूहों एवं अशासकीय संस्थाओं आदि को नवीन एवं कौशल उन्नयन प्रशिक्षण, डिजाईन विकास, उत्पादन परिवर्तन, विपणन एवं निर्यात से जुड़ी हुई गतिविधियों की सहायता के लिये योजना का संचालन किया जाता है ।

10. स्पेशल प्रोजेक्ट:

खादी तथा ग्रामोद्योग के प्रमुख कलस्टरों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक एवं आर्थिक उत्थानों के लिये अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन, डिपार्टमेंट फॉर इन्टरनेशनल डेव्हलपमेंट (DFID) आदि के सहयोग देने से परियोजना क्रियान्वयन में भागीदारी के लिये प्रदेश में संचालित उत्पादन केन्द्रों में कार्यरत कारीगरों/कत्तिनों एवं बुनकरों के लाभ के लिये योजनायें संचालित कर उन्हें लाभांवित किया जाता है ।

11. अनुसंधान एवं विकास हेतु सहायता:

बोर्ड द्वारा अपने विभागीय केन्द्रों में उत्पादित सामग्री को और अधिक आकर्षण एवं मांग के अनुरूप बनाने की दृष्टि से निरंतर अनुसंधान विकास का कार्य किया जाता है।

12. बोर्ड अमले को तकनीकी प्रशिक्षण:

बोर्ड के अधिकारी/कर्मचारियों को समय-समय पर कार्यालयीन व्यवस्था, कम्प्युटर कार्य, सूचना का अधिकार, विपणन, लेखा एवं व्यवस्थित तरीके से नियमानुसार कार्यालयीन कार्य निष्पादन के लिये विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता है।