मध्यप्रदेश माटी कला बोर्ड

मध्यप्रदेश शासन

aboutहमारे बारे में

प्रदेश के कुम्हारी(पॉटरी) एवं मिट्‌टी का कार्य करने वाले कारीगरों के व्यवसाय की वृद्धि, तकनीकी सुविधिा एवं विपणन आदि सुविधा उपलब्ध कराने के लिये माननीय मुख्यमंत्री जी के संकल्प से दिनांक 5 जून-2008 को मध्यप्रदेश माटीकला बोर्ड, भोपाल का गठन स्वशासी निकाय के रूप में किया गया ।मध्यप्रदेश माटीकला बोर्ड का गठन दिनांक 5 जून-2008 से मध्यप्रदेश शासन कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के अधीन कार्यरत है।

उद्देश्य

  • माटी कार्य कुम्हारी (पाटरी) एवं शिल्प उद्योग के लिये नई नीति का निर्माण करने तथा विनियोजन अनुदान वेट टेक्स विद्युत दरों आदि में इन उद्योग को सुविधा प्रदान करने पर सुझाव देना।
  • तकनीकी उन्नयन एवं आधुनिकीकरण के संबंध में प्रभावी योजना बनाना एवं धनराशि की व्यवस्था करना।
  • माटीकला से संबंधित कार्य करने वाले केन्द्रीय एवं प्रांतीय संस्थाओं जैसे विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) विकास आयुक्त (हाथकरघा) खादी तथा ग्रामोद्योग आयोग से समन्वय स्थापित करना ।
  • केन्द्र सरकार राज्य शासन एवं सार्वजनिक क्षेत्र से माटी का कार्य करने वालों को सुविधाएं एवं सेवायें उपलब्ध कराने के संबंध में समन्वय की व्यवस्था करना।
  • माटी का कार्य करने वाले कारीगरों एवं उद्योगों की समस्याओं का निराकरण करने का सुझाव देना।

माटीकला बोर्ड की दृष्टि

  • मध्यप्रदेश में हर जिले में मिट्‌टी प्रचुर मात्रा में मिलती है, अतः मिट्‌टी का कार्य करने वाले कारीगरों को परम्परागत सामग्री के साथ साथ उन्नत श्रेणी की मूर्तियां, खिलौने, सजावटी वस्तुए एवं उपयोगी सामग्री निर्माण करने की ओर प्रेरित करना।
  • सामान्य मिट्‌टी के बर्तनों के स्थान पर टेराकोटा, सिरेमिक, टाईल्स एवं कबेलू के निर्माण की ओर प्रशिक्षित कर रोजगार उपलब्ध कराना।
  • माटीशिल्प विकास के लिये सर्वोच्च प्राथमिकता उन्नत प्रशिक्षण की है ताकि इस वर्ग के हितग्राहियों की गुणवता में वृद्धि एवं कार्यक्षमता बढ़ने से आय एवं जीवनस्तर में सुधार हो सके। ग्यारहवीं योजना की केवल 101 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया था। बारहवीं पंचवर्षीय योजना में 500 लोगों को उन्नत प्रशिक्षण दिया जावेगा।
  • माटीशिल्प के विकास के लिये प्रमुख क्लस्टर का चयन कर उन्हें विकसित किया जावेगा। प्रतिवर्ष 500 विद्युत चलितशैला चाक का वितरण कर क्षमता वृद्धि तथा गुणवत्ता में सुधार किया जावेगा।
  • गुणवत्ता क्षमता एवं कला के विकास के लिये राष्ट्रीय प्रशिक्षण प्राप्त संस्थाओं का सहयोग लिया जावेगा।
  • माटीशिल्प के उत्पादन, रोजगार एवं इससे जुड़े लोगों का आर्थिक सर्वेक्षण कर उनके जीवन स्तर में वृद्धि का प्रयास किया जावेगा।
  • स्थानीय बाजार का सुद्रढ़ किया जावेगा ताकि परप्रान्तीय सामग्री के स्थान पर प्रदेश में निर्मित सामग्री का बाजार बन सके।
  • नवीन पीढ़ी को इस उद्योग से जोड़ने का प्रयास किया जावेगा।

प्रदेश में प्राप्त मिट्‌टी का परीक्षण कराया जावेगा ताकि मिट्‌टी की गुणवत्तानुसार सामग्री का उत्पादन कराकर क्लस्टर में विकास किया जा सके।

क्यों माटीकला बोर्ड...?

प्रदेश का कुंभकार समाज असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है। कुम्हार वर्तमान में भी परम्परागत रूप से मिट्‌टी के मटके, सुराही, हण्डे एवं अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुओं का निर्माण कर रहा है जिनकी मांग आधुनिक परिवेश में कम हुई है।
प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2008 में मध्यप्रदेश माटीकला बोर्ड, का गठन किया गया है। माटीकला बोर्ड प्रदेश  मिट्‌टी से संबंधित उद्योगों से जुड़े कारीगरों, शिल्पियों को आधुनिक तकनीकी का प्रशिक्षण प्रदान कराकर, देश के अन्य प्रदेशों में हो रहे उत्कृष्ट ऐसे उत्पादों का निर्माण करने के लिये आवश्यक मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराएगा जिससे कुंभकार समाज का आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान हो ।