राज्य सिल्क फेडरेशन

मध्यप्रदेश शासन

हमारे बारे में

मध्यप्रदेश सिल्क फेडरेशन का गठन दिनांक 24.11.1997 को हुआ तथा दिनांक 01.04.1998 से संघ द्वारा कार्य प्रारंभ किया गया है। परिचय -

मध्यप्रदेश शासन द्वारा सिल्क फेडरेशन को रेशम की ’’पोस्ट ककून एक्टीविटीज’’ का कार्य सौंपा गया है, जिसमें हितग्राहियों द्वारा उत्पादित ककून को क्रय करना सम्मिलित है ताकि उनको उत्पाद का समुचित मूल्य मिल सके एवं उनका आर्थिक शोशण बिचैलियों द्वारा न किया जा सके । फेडरेशन द्वारा अपने गठन के पश्चात् मध्यप्रदेश में विपणन की विकेंद्रित व्यवस्था को अपनाते हुये विभिन्न ककून / यार्न बैंक की स्थापना की गयी । वर्तमान में संघ के आठ ककून / यार्न बैंक संचालित है । 10 शो-रूम के माध्यम से रेशम वस्त्र विक्रय गतिविधियाॅ भी संचालित की जा रही है ।

सदस्य समितियाॅं -

प्रदेश में संघ की कुल 56 सहकारी समितियां सदस्य हैं, संघ में इन सदस्य समितियों की अंशपूंजी रूपये 7100/- है जिसको बढाने के प्रयास किए जा रहे है ।

  1. कृमिपालन समितियाॅं - 39
  2. बुनकर समितियाॅं - 16
  3. धागाकरण समितियाॅं - 01

उद्देश्य -

  • प्रदेश में रेशम हितग्राहियो का हित संवर्धन व प्रभावी बाजार व्यवस्था की स्थापना
  • प्रदेश के रेशम उत्पादन एवम् उपोत्पाद की संगठित विपणन व्यवस्था की स्थापना।
  • प्रदेश के अनुसूचित जाति/जनजाति के सर्वहारा वर्ग के भूमिहीन व सीमांत कृशको को रोजगार के वैकल्पिक अवसर उपलब्ध कराकर शहरो की ओर होने वाले पलायन को रोकना ।
  • रेशम उत्पादों के लिये प्रभावी मूल्य संवर्धन योजना तैयार कर प्रदेश के हितग्राहियों को लाभांवित करना ।
  • विभिन्न रेशम गतिविधियों यथा कृमिपालन, धागाकरण, रेशम वस्त्र बुनाई, वस्त्र प्रसंस्करण व वस्त्र विक्रय से जुडे हितग्राहियों के मध्य समन्वयक की भूमिका निभाकर हितग्राहियों को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल प्रदान करना ।

कर्मचारी व्यवस्था -

मध्यप्रदेश सिल्क फेडरेशन का पृथक से कोई कर्मचारी अमला स्वीकृत नहीं है। रेशम संचालनालय के अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा संघ के कार्य किये जा रहे हैं ।

वित्तीय व्यवस्था -

मध्यप्रदेश शासन से प्राप्त राशि रूपये 88.05 लाख की अंशपुंजी से व्यवसाय किया जा रहा है । संघ द्वारा अभी तक किसी बैंक/संस्था से कोई ऋण प्राप्त नहीं किया गया है ।

उत्पादन/कार्यक्रम -

  1. प्रदेश में रेशम संचालनालय,के हितग्राहियों द्वारा उत्पादित ककून क्रय करना । उत्पादित ककून के धागाकरण हेतु उन्नत रीलिंग इकाईयों की स्थापना।
  2. प्रदेश में निजी क्षेत्र में भी रीलिंग इकाईयों की स्थापना को प्रोत्साहन के फलस्वरूप कटंगी (बालाघाट) तथा साल्हेचैका (नरसिंहपुर) में निजी उद्यमियों द्वारा रीलिंग इकाई की स्थापना । इन इकाईयो हेतु कोया फेडरेशन द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है ।
  3. फेडरेशन द्वारा उत्पादित रेशम धागे से रेशम वस्त्र उत्पादन का कार्यक्रम बुनकर क्षेत्रों सारंगपुर(राजगढ़), महेष्वर (खरगौन), वारासिवनी,मंडला,एवं विदिशा में लिया जाकर वस्त्र बुनाई कराना । इन क्षेत्रों में बुनकरों को रेशम धागा एवं तकनीकी मार्गदर्षन प्रदान किया जाता है ।
  4. केंद्रीय रेशम बोर्ड की सहायता से रेशम उत्प्रेरण विकास योजनांतर्गत रेशम वस्त्र डिजाइन डेव्हलपमेंट कार्य भी किया जा रहा है ।
  5. स्थानीय स्तर पर वस्त्र विक्रय हेतु भोपाल में संघ द्वारा चार शोरूम एवम् प्रदेश के अन्य जिलों में 6 शो-रूम की स्थापना की गई है ।

संघ के ककून बैंक/यार्न बैंक निम्नानुसार स्थापित हैं-

  • यशवंतसागर (इंदौर) ।
  • बालाघाट
  • देवदरा(मंडला) ।
  • मुंगवानी (नरसिंहपुर)
  • राघोगढ़
  • सारंगपुर(राजगढ़) ।
  • सिरोंज (विदिशा) ।
  • मालाखेड़ी (होशंगाबाद) ।

संघ के शो-रूम निम्नानुसार स्थापित हैं-

  • प्राकृत शो-रूम पचमढ़ी जिला होशंगाबाद ।
  • प्राकृत शो-रूम मालाखेडी जिला होशंगाबाद
  • प्राकृत शो-रूम इन्दौर जिला इन्दौर।
  • प्राकृत शो-रूम पिपरिया जिला होशंगाबाद।
  • प्राकृत शो-रूम पथरोटा जिला होशंगाबाद।
  • कान्हा शोरूम कान्हा मण्डला ।
  • कतान शो-रूम न्यू मार्केट भोपाल ।
  • कतान शो-रूम जहांगीराबाद भोपाल ।
  • प्राकृत शो-रूम संजीवनी परिसर भोपाल।
  • प्राकृत शो-रूम गोहर महल भोपाल।

सिल्क मार्क विश्वास का प्रतीक -

केन्द्रीय रेशम बोर्ड द्वारा शुद्व रेशम की पहचान स्थापित करने के लिए सिल्क मार्क टेªड मार्क प्रदान किया जाता है । यह शुद्व रेशम की पहचान प्रमाणित करता है । प्रदेश में मध्यप्रदेश सिल्क फेडरेशन द्वारा सिल्क मार्क प्राप्त कर उपभोक्ताओ में रेशम की शुद्वता का विश्वास स्थापित करने की पहल की गई है ।

वस्त्रों के बुनाई से क्षेत्रीय बुनकर समितियां लाभांवित हो रही है । साथ ही छपाई/कढ़ाई आदि के कार्य से शिल्पियों को लाभ हो रहा है । रेशम कोया एवं धागा का संगठित बाजार प्रदेश में उपलब्ध नहीं है । अतः रेशम उत्पादों की विपणन व्यवस्था फेडरेशन द्वारा ही की जाती है, जिसका लाभ प्रदेश के सर्वहारा वर्ग के ककून एवं रेशम उत्पादकों विशेशकर महिलाओं को प्राप्त हो रहा है ।

बुनकरों द्वारा तैयार किये गये वस्त्रों की विक्रय करने एवं उन्हें लाभांवित करने के उद्देष्य से संघ द्वारा विभिन्न शहरों में आयोजित प्रदर्शनियों में भाग लेने हेतु उन्हें प्रेरित किया जाता है ताकि सिल्क फेडरेशन के विपणन कार्यक्रम के अंतर्गत उनके उत्पादन का उन्हें पूरा लाभ मिल सके ।